वो राह एकदम से रुक गयी
जिससे में गुजरने वाला था
तेरी भी क्या करामात थी ए खुदा
जिस राह पे मुझे रुकना ही था
...लौटा दिया उस खुदा को वो सब,
जो मेने कभी उससे मांगा था.
"होंसले ए पांडवास" काफी था
मेरी मंजिल को पाने में ......
कुछ ख्वाब लेके निकले थे जिंदगी को तलाशने,
पता नही कब मेरी राह बदल गयी,
मेरी जिंदगी वहा आके रुकी जहाँ
जहाँ से मेने इसकी शुरुआत की थी .....
आप तो बहुत प्यारा लिखते हैं...बधाई.
ReplyDelete_________________
'पाखी की दुनिया' में भी घूमने आइयेगा.
जरुर.....हम तो बखूबी आते है .....
Deletebahut khoobsoorat prastuti
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद....सर जी .....
Deleteसुन्दर रचना पढ़वाने के लिए आभार!
ReplyDeleteकृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...
वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो NO करें ..सेव करें ..बस हो गया!
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तुम मुझे गाय दो, मैं तुम्हे भारत दूंगा