Wednesday, July 22, 2015

सोशल मीडिया की सक्रियता

सोशल मीडिया की सक्रियता


आज के इस आधुनिकता के युग में, सोशल मीडिया जिस तरह से छाया हुआ है, शायद ही ऐसा कभी भूतकाल में देखने को मिला हो. फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सअप ने तो लोगो की जिन्दगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही उलाझा सा दिया है.
लगभग हर उम्र के समूह का व्यक्ति, चाहे वो बच्चा हो या बुजुर्ग, सब इसके जाल में फसे हुए है.

सोशल मीडिया की बढती सक्रिता ने लोगो की जिन्दगी को जितना अनजान लोगो से जोड़ने का काम किया है, उतना ही इसकी सक्रियता ने लोगो को अपनों से दूर किया है, आज लगभग हर घर में एंड्राइड नामक एक ऐसा जिन्न मौजूद है, जो हर पल आपको दुनिया के कोने कोने से जोड़ने का काम करता है, और आपके अकेलेपन में अपनों के साथ गप्पे लड़ाने में भी महफ़िल जमाता है.

भागदौड़ भरे इस दौर में, एक तरफ सोशल मीडिया ने लोगो की जिन्दगी को आसान बनाया है, बैठे बैठे उनके दैनिक दिनचर्या के काम काज पुरे होते है, वही दूसरी और सोशल मीडिया के प्रति जरुरत से ज्यादा जुड़ाव ने उन्हें वशीभूत कर दिया है, जिसका सीधा सीधा असर उनके सामाजिक जीवन पे पड़ रहा है, अपनी भावनाओ को जाहिर करने में शब्दों का कम और इमोटिकॉन का ज्यादा प्रयोग करते है. ऑनलाइन घंटो तक मिलने की योजना बनाते है, और जब मिलते है तो, आधे से ज्यादा समय मोबाइल में ही गुजार देते है. और

इस तरह सोशल मीडिया का ताना बाना, जितना सरल और सुविधापूर्ण है, उतना ही सामाजिकता और आपसी सौहार्द की परम्परा को हासिये पे लाके खडा करता है, जिसका भविष्य इतना उजला नहीं दिखता.

जो भी हो, हर चीज के दो पहलु होते है, एक अच्छा और दूसरा बुरा, या फिर यु लीजिये एक सकारात्मक दूसरा नकारात्मक, तो सोशल मीडिया भी भला इससे अछुता कैसे रह पाता ! पर इसकी बढती हुई सक्रियता को नियंत्रण करना बहुत जरुरी है, क्योंकी जब बात अति की आती है तो, संस्कृत भाषा का एक ही श्लोक याद आता है, अति सर्वत्र वर्जितं .


                              लेख़क लालू वैष्णव प्रसाद

Saturday, January 21, 2012

ये दिल तोड़ दिया ......

दिलही चाह से गए थे हम उनसे मिलने,
जब हुई मुलाकात तो उन्होंने मुह मोड दिया I (1)

बेरहम वक्त ने मुझे , ये क्या सिला दिया ,
एक ही पल में, उन्होंने दिल तोड़ दिया  II (2)




                                         हिस्सों में बट गयी थी मेरी जिंदगी ,
                                         अब किस्मत ने एक और किस्सा जोड़ दिया I (3)
                  
                                         मजबूर होंगे शायद वो भी, में ये समझा ,
                                         उन मजबूर हालातों ने, ये दिल तोड़ दिया II (4)          


चला जा रहा था अब, राह में अकेला ,
एक झोखे ने सारा , तूफान मोड दिया I (5)

चेहरा था उदासीन, होठो पे था सवाल ”फ़िशा “
उस अनकहे सवाल ने, ये दिल तोड़ दिया II (6)

                           - लालू प्रसाद वैष्णव  "फ़िशा "




Sunday, July 24, 2011

ONE WAY....

वो राह एकदम से रुक गयी
जिससे में गुजरने वाला था
तेरी भी क्या करामात थी ए खुदा
जिस राह पे मुझे रुकना ही था

...लौटा दिया उस खुदा को वो सब,
जो मेने कभी उससे मांगा था.
"होंसले ए पांडवास" काफी था
मेरी मंजिल को पाने में ......


कुछ ख्वाब लेके निकले थे जिंदगी को तलाशने,
पता नही कब मेरी राह बदल गयी,
मेरी जिंदगी वहा आके रुकी जहाँ
जहाँ से मेने इसकी शुरुआत की थी .....

Monday, January 24, 2011

TRUTH......


Everybody love to fly...
Rest buddy has to cry....
Life have a simple meaning...
When u r so happy...
Dont go 4 over fly and....
...When u r so sad...
No need to be shy......

Friday, January 7, 2011

हिम्मत

धुंधली दुनिया को मिटा सकते है हम
अंधेरो में भी रोशनी जला सकते है हम,
मत पूछो हमारी हिम्मत "ए फ़िशा"
आसमान के भी पार जा सकते है हम.....

Tuesday, January 4, 2011

शिकायत

ज़माने से हमने उनको रूबरू किया
गलत सही का उनको एहसास दिया,
आज वो ही हमे पूछते है "ए फ़िशा"
की तुमने हमारे लिए और क्या किया?.....

एहसास

बीते लम्हों के साथ ज़िन्दगी नहीं चल पाती है
हर पल किसी अंजान की याद बहुत सताती है
यु तो वो हर वक़्त साथ मे ही थे " ए फ़िशा "
इसी एहसास से ज़िन्दगी रुक नहीं पाती है